Saturday, April 12, 2014

अपना एक द्वीप खोजना

वो सामने बैठी औरत
वह नहीं
तुम थीं
और यह उपन्यास कैसा
जिसका
हर शब्द
तुम्हारा नाम है.

ब्रेक फेल हो गए हैं
मन के -
बस व्याख्या कर दी.

हर शाम
परेशानी का थमना
शहर की
आवारा सड़कों पर
अपना एक द्वीप खोजना
और
पा लेना
भी तो अभ्यास हो आया था.

पर हंसी
किस गली मुड़ी
कि गुम ही गयी.  

(१९८२-१९८४ के दरम्यान)

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