तुम्हारी ख़ामोशी
बहुत
कुछ कह जाती है.
मैं ही
नहीं सुनने का
चेहरा बना लेता हूँ.
इसी में
ठीक है -
और सरल भी -
कि तुम समझो
मै बहरा हूँ.
(दिसंबर १९८२)
बहुत
कुछ कह जाती है.
मैं ही
नहीं सुनने का
चेहरा बना लेता हूँ.
इसी में
ठीक है -
और सरल भी -
कि तुम समझो
मै बहरा हूँ.
(दिसंबर १९८२)
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