ठेका तो उन्होंने जंगल काटने का हथियाया था
पर हम समझ नहीं पाये कि
उनकी नज़र तो पानी पर थी
और जब तक हमारी समझ पानी तक पहुँचती
वे हमारी खेती भी खा गए थे.
सूख चुकी नदियों पर उन्होंने सड़कें बनायीं
और खेतों में शहर.
हमको उन्होंने दी अफ़ीम
और छोड़ दिया सपनों की देहरी पर
एक सपने के इंतज़ार में
और उसके बाद दूसरे के
और दूसरे के भी विफल हो जाने पर
फिर तीसरे के इंतज़ार में.
हम आज भी उसी देहरी पर ख़ड़े हैं;
खड़े ही नहीं बल्कि
बोरिया बिस्तर समेत अड्डा जमा लिए हैं
क्योंकि हमको अब अफ़ीम की लत पड़ चुकी है.
बहुत हो गया तो
अपनी हथेलियों की लकीरों को गिन लेते हैं
जो पहले तो ऐसी न थी
अन्यथा हम इसी बात से खुश हैं
कि कहाँ था अपनी किस्मत में
ऐसी रंगीन अट्टालिकाओं को देखना,
बेशक हाशिये पर से ही सही.
(१८ जून २०१४)
पर हम समझ नहीं पाये कि
उनकी नज़र तो पानी पर थी
और जब तक हमारी समझ पानी तक पहुँचती
वे हमारी खेती भी खा गए थे.
सूख चुकी नदियों पर उन्होंने सड़कें बनायीं
और खेतों में शहर.
हमको उन्होंने दी अफ़ीम
और छोड़ दिया सपनों की देहरी पर
एक सपने के इंतज़ार में
और उसके बाद दूसरे के
और दूसरे के भी विफल हो जाने पर
फिर तीसरे के इंतज़ार में.
हम आज भी उसी देहरी पर ख़ड़े हैं;
खड़े ही नहीं बल्कि
बोरिया बिस्तर समेत अड्डा जमा लिए हैं
क्योंकि हमको अब अफ़ीम की लत पड़ चुकी है.
बहुत हो गया तो
अपनी हथेलियों की लकीरों को गिन लेते हैं
जो पहले तो ऐसी न थी
अन्यथा हम इसी बात से खुश हैं
कि कहाँ था अपनी किस्मत में
ऐसी रंगीन अट्टालिकाओं को देखना,
बेशक हाशिये पर से ही सही.
(१८ जून २०१४)