मुझे दोनों देखने हैं -
जो मुझे दिखता है
और जो नहीं दिखता है.
तभी मैं पूरा देख पाऊंगा.
जो नहीं दिखता है
उसके बगैर
जो दिखता है
वह अधूरा है
जैसे एक स्वप्न
या एक भ्रम.
मैं वह भी हूँ
जो मैं नहीं हूँ.
* * *
३० अप्रैल २०१२