Sunday, April 29, 2012

मैं वह भी हूँ जो नहीं हूँ

मुझे दोनों देखने हैं -
जो मुझे दिखता है 
और जो नहीं दिखता है.
तभी मैं पूरा देख पाऊंगा.

जो नहीं दिखता है 
उसके बगैर 
जो दिखता है 
वह अधूरा है 
जैसे एक स्वप्न 
या एक भ्रम.

मैं वह भी हूँ
जो मैं नहीं हूँ.


* * *
३० अप्रैल २०१२ 

Sunday, April 15, 2012

शायद

विपिन पारीख

मुझे मेवाड़ में मीरा मिली नहीं.
वृन्दावन में राधा मिली नहीं.
पर शायद
इसमे मेरा भी दोष हो.
मैंने मुंबई छोड़ी ही न हो.

***
जनसत्ता, १५ अप्रैल 2012