Wednesday, August 3, 2011

सूखा

बेरहम आसमान -
ठहरता नहीं कहीं 
बादल का एक कतरा 
तरस गयी हैं 
आँखें
देखनें के लिए
जैसे किसी को.

बेरहम आसमान -
होती नहीं कहीं 
बादलों की गढ़गढ़ाहट;
तरस गए हैं 
कान
सुनने के लिए 
जैसे किसी की आवाज़.

बेरहम आसमान -
उठती नहीं कहीं
पहली बूंदों से सोंधी महक;
तरस गया है
एहसास
जैसे किसी खुशबू के लिए.

बेरहम आसमान -
बहती नहीं कहीं
गीली हवा;
तरस गया है
मन
जैसे एक छुअन के लिए.

***

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