बेरहम आसमान -
ठहरता नहीं कहीं
बादल का एक कतरा
तरस गयी हैं
आँखें
देखनें के लिए
जैसे किसी को.
बेरहम आसमान -
होती नहीं कहीं
बादलों की गढ़गढ़ाहट;
तरस गए हैं
कान
सुनने के लिए
जैसे किसी की आवाज़.
बेरहम आसमान -
उठती नहीं कहीं
पहली बूंदों से सोंधी महक;
तरस गया है
एहसास
जैसे किसी खुशबू के लिए.
बेरहम आसमान -
बहती नहीं कहीं
गीली हवा;
तरस गया है
मन
जैसे एक छुअन के लिए.
***
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