Tuesday, April 20, 2010

एक बीता क्षण

एक क्षण
बीता हुआ,
एक हंसी
गुज़री हुई।

पृथ्वी घूम कर
फिर
वहीँ से गुजरेगी
कि नहीं,
अब देखना है।

(१९८० से २००५ के दरम्यान)

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